लक्सर। डॉ.अंबेडकर राष्ट्रीय अधिवक्ता संघ (भारत) यूनिट लक्सर के बैनर तले शनिवार को लक्सर तहसील में भारत रत्न, संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर अधिवक्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में अधिवक्ताओं ने बाबा साहेब के जीवन, आदर्शों और भारत के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। अधिवक्ता पदम कुमार ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने सामाजिक समानता, दलित उत्थान, शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 6 दिसंबर 1956 को उनका महापरिनिर्वाण हुआ और तब से यह दिन उनके अनुयायियों द्वारा उनके आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा के रूप में मनाया जाता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता नाहिद खान ने डॉ. अंबेडकर के संघर्षों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सदैव वंचित और शोषित वर्ग की आवाज बुलंद की और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर का अंतिम संस्कार मुंबई की चैत्यभूमि में किया गया था, जो आज भी उनके अनुयायियों के लिए तीर्थस्थल है।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश कुमार ने कहा कि परिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब को याद करना भारत के संवैधानिक मूल्यों को याद करने जैसा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब द्वारा निर्मित संविधान ही देश की मजबूत नींव है और सभी नागरिक एवं संस्थान उसी के आधार पर कार्य कर रहे हैं।
पूर्व बार काउंसिल अध्यक्ष विकास पवार ने कहा कि जिस दृष्टि और दूरदर्शिता के साथ बाबा साहेब ने देश को संविधान की सौगात दी, वह भारत को एक सशक्त लोकतंत्र बनाने में आज भी मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज बाबा साहेब के बताए संवैधानिक सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संगोष्ठी में वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार आर्य, अधिवक्ता पदम सिंह, अधिवक्ता राहुल कुमार, अधिवक्ता संजीव कुमार, अधिवक्ता विकास पवार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने बाबा साहेब के आदर्शों को समाज में सार्थक बदलाव लाने की प्रेरणा बताया।