हरिद्वार ग्रमीण में फार्म-7 के दुरुपयोग से वोट काटने का आरोप, अनुपमा रावत ने दी धरने की चेतावनी -

हरिद्वार। प्रेस क्लब हरिद्वार में मंगलवार को प्रेसवार्ता कर कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में फार्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी चोरी से वोट काटने का अभियान शुरू हो गया है। हरिद्वार ग्रामीण में फार्म-7 के माध्यम से वैध और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विधायक ने कहा कि हरिद्वार ग्रामीण का एक भी वैध वोट गलत तरीके से नहीं कटने दिया जाएगा। फार्म-7 का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि हरिद्वार ग्रामीण के बीएलए-1 तबरेज आलम के साथ ईआरओ से मुलाकात कर ज्ञापन दिया गया है। इसमें फार्म-7 के दुरुपयोग को रोकने और गलत शिकायत करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।


चार दिनों में 884 मतदाताओं के नाम हटाने का दावा
अनुपमा रावत ने बताया कि छह अगस्त को फार्म-7 भरकर एक मतदाता का नाम हटाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार संबंधित मतदाता उसी मतदान भाग में निवास करता है और कई बार मतदान कर चुका है। इसके बाद सात अगस्त को 126, आठ अगस्त को 426 और नौ अगस्त को 331 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फार्म-7 के माध्यम से शिकायतें की गईं। विधायक ने चार दिनों में कुल 884 मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास का दावा किया।


उन्होंने कहा कि बीएलए-2 से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित मतदाता अपने-अपने मतदान भाग में निवास कर रहे हैं और किसी अन्य मतदान केंद्र पर मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं।
एक व्यक्ति के कई फार्म-7 भरने पर उठाए सवाल
विधायक ने दावा किया कि हरिद्वार ग्रामीण में कई ऐसे मामले हैं, जहां एक ही व्यक्ति ने पांच से अधिक फार्म-7 का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि सात अगस्त को जोगेंद्र सिंह ने 11, गुरबाज सिंह ने सात और अर्थव यादव ने सात फार्म-7 भरकर मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत की।


उन्होंने कहा कि फार्म-10 के अवलोकन से अन्य दिनों में भी ऐसे कई मामले सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिनमें एक व्यक्ति ने पांच से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फार्म-7 का प्रयोग किया।
फार्म-10 को सार्वजनिक करने की मांग
अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि फार्म-10 को नियमानुसार कार्यालय के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के मतदाता मैनुअल के अनुसार फार्म-10 को सार्वजनिक सूचना के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एएसडीडी के कारण जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनके फार्म-10 भी नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं किए गए और मतदाताओं को नोटिस नहीं भेजे गए।
भाग समिति से जांच कराने की मांग
ज्ञापन में फार्म-7 के माध्यम से प्राप्त ऑनलाइन शिकायतों को संबंधित मतदान भाग की समिति के पास भेजकर मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई। समिति यह जांच करे कि जिस मतदाता का नाम हटाने के लिए फार्म-7 भरा गया है, वह संबंधित भाग में निवास करता है या नहीं। शिकायत गलत पाए जाने पर उसे निरस्त कर मतदाता का नाम सूची में यथावत रखने की मांग की गई।
विधायक ने 14 जुलाई 2026 के बाद फार्म-7 के माध्यम से नाम हटाने के लिए प्राप्त शिकायतों को फार्म-10 में संकलित कर वेबसाइट पर प्रदर्शित करने की मांग भी की। इसके अलावा आपत्तिकर्ता को फार्म-13 और संबंधित मतदाता को फार्म-14 का नोटिस भेजकर सुनवाई कराने की मांग की।


झूठी शिकायत पर कार्रवाई की मांग
अनुपमा रावत ने कहा कि फार्म-7 में आपत्तिकर्ता का ईपीआईसी नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज होता है। इनकी जांच कर यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि बीएलए-1 तबरेज आलम ने ज्ञापन की प्रति राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी भेजी है।


आज ही कार्रवाई नहीं हुई तो धरने की चेतावनी
विधायक ने चेतावनी दी कि यदि फार्म-7 के कथित दुरुपयोग से मतदाताओं के नाम काटने का प्रयास नहीं रोका गया तो वह जिला मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं जिलाधिकारी हरिद्वार के कार्यालय पर धरना देंगी। उन्होंने कहा कि ईआरओ को गलत तरीके से फार्म-7 का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो उनके बीएलए-1 तबरेज आलम कानूनी कार्रवाई करेंगे।
अनुपमा रावत ने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखना जरूरी है। किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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