लक्सर। पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार पर किसानों एवं ग्रामीणों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं लक्सर में किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक उस वादे को पूरा नहीं किया गया। ऐसे में सरकार किसानों और ग्रामीणों से वोट मांगने का नैतिक अधिकार खो चुकी है।

सोमवार को जारी प्रेस वार्ता में आनंद ने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री की घोषणा से किसानों में उम्मीद जगी थी कि सरकार उनकी समस्याओं को समझ रही है और राहत देने के लिए गंभीर है। लेकिन समय बीतने के बावजूद किसानों को बिजली बिल माफी का लाभ नहीं मिला। इसके विपरीत बिजली बिलों पर बढ़ते सरचार्ज और शुल्कों ने किसानों की आर्थिक परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
उन्होंने कहा कि लक्सर, हरिद्वार और प्रदेश का किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, जंगली जानवरों के हमलों तथा खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे समय में बिजली के बढ़ते बिल किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं।

रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि हरिद्वार जनपद का किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। गन्ना, धान, गेहूं और अन्य फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को सरकार सम्मान और राहत देने के बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित रख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय किसानों को बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उनकी समस्याओं को भुला दिया जाता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने के अपने वादे को पूरा नहीं कर सकती तो उसे किसानों और ग्रामीणों से वोट मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “धामी जी किसानों से वोट मत मांगना, धामी जी ग्रामीणों से वोट मत मांगना। तीन माह के बिजली बिल माफी का वादा करने के बाद जब किसानों को कोई राहत नहीं मिली तो आखिर किस मुंह से आप गांव-गांव जाकर वोट मांगेंगे।”
पूर्व राज्य मंत्री ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की नीतियों की तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में निजी नलकूपों पर किसानों को बिजली शुल्क में बड़ी राहत दी जा रही है, जबकि उत्तराखंड में बिजली लगातार महंगी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाले उत्तराखंड में ही किसान सबसे महंगी बिजली का बोझ उठाने को मजबूर हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

आनंद ने कहा कि बिजली बिल, सरचार्ज और अन्य शुल्कों ने किसानों को कर्ज और आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है। गांवों में हजारों परिवार ऐसे हैं जो समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से किसानों के तीन माह के बिजली बिल तत्काल माफ करने, सरचार्ज समाप्त करने तथा कृषि विद्युत दरों में विशेष राहत देने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया तो लक्सर से लेकर हरिद्वार और पूरे प्रदेश में किसान, मजदूर और ग्रामीण जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख और समझ रही है तथा समय आने पर अपना निर्णय भी सुनाएगी।


